Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 30 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 30

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 30
Shloka
प्रणष्टस्वामिकं रिक्थं राजा त्र्यब्दं निधापयेत्। अर्वाक्त्र्यब्दाद्धरेत्स्वामी परेण नृपतिर्हरेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(प्रणष्टस्वामिकं रिक्थम्) मालिक से रहित धन अर्थात् लावारिस धन को (राजा) राजा (त्रि + अब्दम्) तीन वर्ष तक (निधापयेत्) सुरक्षित रखे (त्रि + अब्दात् अर्वाक् स्वामी हरेत्) तीन वर्ष से पहले यदि स्वामी आ जाये तो वह उसको ले ले [८ | ३१] (परेण नृपतिः हरेत्) उसके बाद उसे राजा लेले॥३०॥