Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 287 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 287

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 287
Shloka
अङ्गावपीडनायां च व्रणशोनितयोस्तथा। समुत्थानव्ययं दाप्यः सर्वदण्डं अथापि वा॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अङ्ग + अवपीडनायाम्) किसी अङ्ग के टूटने, कटने आदि पर (तथा) और (व्रण-शोरिणतयोः) घाव करने तथा रक्त बहाने पर (समुत्थानव्ययं दाप्यः) जब तक रोगी पहले जंसी अवस्था के रूप में ठीक न हो जाय तब तक सम्पूर्ण औषधि आदि का व्यय मारने वाले से दिलवाये (अथापि वा) और साथ ही यदि उचित समझे तो (सर्वदण्डम्) उस पर पूर्ण दण्ड करे ॥२८७॥