Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 28 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 28

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 28
Shloka
वशापुत्रासु चैवं स्याद्रक्षणं निष्कुलासु च। पतिव्रतासु च स्त्रीषु विधवास्वातुरासु च॥

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Subject
वन्ध्यादि के धन की रक्षा-
Meaning
(वन्ध्या + अपुत्रासु) बांझ और पुत्रहीन (निष्कुलासु) कुलहीन अर्थात् जिसके कुल में कोई पुरुष न रहा हो (पतिव्रतासु) पतिव्रता स्त्री अर्थात् पति के परदेशगमन आदि कारण से जो स्त्री अकेली हो (विधवासु) विधवा (च) और (आतुरासु) रोगिणी (स्त्रीषु) स्त्रियों की सम्पत्ति की (रक्षणम्) रक्षा भी (एवम्) इसी प्रकार अर्थात् उनके समर्थ हो जाने तक (स्यात्) करनी चाहिए॥२८॥