Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 265 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 265

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 265
Shloka
सीमायां अविषह्यायां स्वयं राजैव धर्मवित्। प्रदिशेद्भूमिं एकेषां उपकारादिति स्थितिः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(सीमायाम् + अविषह्यायाम्) चिह्नों एवं साक्षियों आदि उपर्युक्त [८ | २४५ – २६३] उपायों से सीमा के निर्धारित न हो सकने पर (धर्मवित् राजा स्वयम् एव) न्याय का ज्ञाता राजा स्वयं ही (एतेषाम् +उपकारात्) वादी-प्रति वादियों के उपकार अर्थात् हितों को ध्यान में रखकर (भूमि प्रदिशेत्) भूमिसीमा को निश्चित कर दे (इति स्थितिः) ऐसी शास्त्र व्यवस्था है ॥२६५॥