Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 250 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 250

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/250
Adhyay 8 Shloka 250
Shloka
अश्मनोऽस्थीनि गोवालांस्तुषान्भस्म कपालिकाः। करीषं इष्टकाङ्गारांश्शर्करा वालुकास्तथा॥

Bhashya

Meaning
राजा (लोके) संसार में (सीमाज्ञाने) सीमा के विषय में (नृणाम्) मनुष्यों का (नित्यं विपर्ययं वीक्ष्य) सदैव मतभेद पाया जाता है, इस बात को ध्यान में रखता हुआ (अन्यानि उपच्छन्नानि सीमालिङ्गानि कारयेत्) दूसरे गुप्त सीमाचिह्नों को भी करवा दे [जैसे-] (अश्मनः) पत्थर (प्रस्थीनि) हड्डियां (गोवालान्) गौ आदि पशुओं के वाल (तुषान्) तुस= चावलों के छिलके आदि (भस्म) राख (कपालिकाः) खोपड़ियां (करीषम) सूखा गोवर (+इष्टक) ईंटें (+अंगारान्) कोयले (शर्करा) पत्थर की रोड़ियां = कंकड़ (तथा) तथा (बालुका:) बालू रेत (च) और (यानि एवं प्रकारारिण) जितने भी इस प्रकार के पदार्थ हैं जिन्हें (कालात् भूमिः न भक्षयेत्) बहुत समय तक भूमि अपने रूप में न मिला सके (तानि) उनको (अप्रकाशानि) गुप्तरूप से अर्थात् जमीन में दबाकर (सीमायां कारयेत्) सीमास्थानों पर रखवा दे॥२४९-२५१ ।।