Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 239 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 239

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 239
Shloka
वृतिं तत्र प्रकुर्वीत यां उष्ट्रो न विलोकयेत्। छिद्रं च वारयेत्सर्वं श्वसूकरमुखानुगम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(तत्र) उस पशुस्थान में (याम् + उष्ट्रः न विलोकयेत्) जिससे ऊंट उसके ऊपर से धान्य को न खा सके इतनी ऊंची (वृतिं कुर्यात्) बाड़ या घेरा बनाये (च) और उसमें (इव - सूकर-मुख+ अनुगम्) कुत्ते तथा सूअरों का मुंह न जा सके ऐसे (सर्वं छिद्रं वारयेत्) सब तरह के छिद्रों को न छोड़े या बन्द कर दे ॥२३९॥