Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 237 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 237

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 237
Shloka
धनुःशतं परीहारो ग्रामस्य स्यात्समन्ततः। शम्यापातास्त्रयो वापि त्रिगुणो नगरस्य तु॥

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1 Bhashyas
Meaning
पशुओं के बैठने व घूमने-फिरने के लिए (ग्रामस्य समन्तात्) गांव के चारों ओर (धनु: शतम्) १०० धनुष अर्थात् चार सौ हाथ तक (वा) अथवा (त्रयः शम्यापाताः) तीन बार छड़ी फेंकने से जितनी दूर जाये वहां तक (अपि तु) और (नगरस्य त्रिगुणः) नगर में इससे तीनगुना (परीहारः) भूखण्ड (स्यात्) होना चाहिए॥२३७॥