Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 235 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 235

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/235
Adhyay 8 Shloka 235
Shloka
अजाविके तु संरुद्धे वृकैः पाले त्वनायति। यां प्रसह्य वृको हन्यात्पाले तत्किल्बिषं भवेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(अजा + अविके) बकरी और भेड़ (वृकै: संरुद्धे) भेड़ियों के द्वारा घेर लिए जाने पर (पाले तु अनायति) यदि चरवाहा उन्हें बचाने के लिए न आये (यां प्रसह्य वृक: हन्यात्) जिस बकरी या भेड़ को कोशिश करके जबरदस्ती भेड़िया मार जाये तो (पाले तत् किल्विषं भवेत्) चरवाहे पर उसका दोष होगा अर्थात् वही उसका देनदार होगा ॥२३५॥