Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 215 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 215

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 215
Shloka
भृतो नार्तो न कुर्याद्यो दर्पात्कर्म यथोदितम्। स दण्ड्यः कृष्णलान्यष्टौ न देयं चास्य वेतनम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो (भृतः) सेवक (अनार्तः) रोगरहित होते हुए भी (यथा + उदितं कर्म) यथा निश्चित काम को (दर्पात्) ग्रहंकार के कारण (न कुर्यात्) न करे (सः अष्टौ कृष्णलानि दण्ड्यः) राजा उस पर आठ 'कृष्णल' [७।१३४] दण्ड करे (च) और (शस्य वेतनं न देयम्) उसे उस समय का वेतन न दे॥२१५॥