Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 213 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 213

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 213
Shloka
यदि संसाधयेत्तत्तु दर्पाल्लोभेन वा पुनः। राज्ञा दाप्यः सुवर्णं स्यात्तस्य स्तेयस्य निष्कृतिः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
(६) वेतन देने न देने का विवाद (२१४ - २१७)
Meaning
(पुनः) वापिस माँगने पर भी (दर्पात् वा लोभेन) अभिमान या लालचवश (यदि तत् संसाधयेत्) फिर भी उस धन को वह याचक मनमाने काम में लगाये अर्थात् वापिस न करे तो (राज्ञा) राजा (तस्य स्तेयस्य निष्कृतिः) उसके चोरीरूप अपराध की निवृत्ति के लिए (सुवर्णं दाप्य: स्यात्) एक 'सुवर्ण' [८।१३४] के दण्ड से दण्डित करे॥२१३॥