Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 212 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 212

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 212
Shloka
धर्मार्थं येन दत्तं स्यात्कस्मै चिद्याचते धनम्। पश्चाच्च न तथा तत्स्यान्न देयं तस्य तद्भवेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(५) दान की हुई वस्तु को लौटाना (२१२ – २१३)(येन) जिसने (कस्मैचित् याचते) किसी मांगने वाले को (धर्मार्थं धनं दत्त स्यात्) धर्मकार्य के लिए धन दिया हो (च) और (पश्चात्) बाद में (तथा तत् न स्यात्) उस याचक ने जैसा कहा था वह काम नहीं किया हो तो (तस्य तत् न देयं भवेत्) उसको वह धन देने योग्य नहीं रहता अर्थात् वह धन उससे वापिस ले ले॥२१२॥