Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 203 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 203

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/203
Adhyay 8 Shloka 203
Shloka
नान्यदन्येन संसृष्ट रूपं विक्रयं अर्हति। न चासारं न च न्यूनं न दूरेण तिरोहितम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अन्येन अन्यत् संसृष्टरूपम्) एक वस्तु में उससे मिलते-जुलते रङ्ग-रूप वाली कम कीमत वाली या खराब वस्तु मिलाकर (न विक्रयम् + अर्हति) नहीं बेची जा सकती (च) और (न असारम्) न बेकार वस्तु (न न्यूनम्) न तोल में कम (न दूरेण तिरोहितम्) न दूर से ग्रस्पष्ट दिखने वाली वस्तु को बेचना प्रामाणिक है ॥२०३॥