Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 200 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 200

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/200
Adhyay 8 Shloka 200
Shloka
संभोगो दृश्यते यत्र न दृश्येतागमः क्व चित्। आगमः कारणं तत्र न संभोग इति स्थितिः॥

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Meaning
(यत्र सम्भोग: श्यते) जहां किसी वस्तु का उपभोग किया जाना देखा जाये (आगम: क्वचित् न दृश्यते) किन्तु उसका आगम= आने का साधन या स्रोत न दिखाई पड़े (तत्र) वहाँ (आगम: कारणम्) आगम-वस्तु की प्राप्ति के स्रोत या साधन के होने को प्रमाण मानना चाहिए (संभोग: न) उपभोग करना उसके स्वामित्व का प्रमारण नहीं है (इति स्थितिः) ऐसी शास्त्र-व्यवस्था है। अर्थात्किसी वस्तु के उपभोग करने से कोई व्यक्ति उसका स्वामी नहीं बन जाता अपि उचित प्राप्ति को सिद्ध करने पर ही उसे उस वस्तु का स्वामी माना जा सकता है ॥२००॥