Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 197 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 197

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 197
Shloka
विक्रीणीते परस्य स्वं योऽस्वामी स्वाम्यसम्मतः। न तं नयेत साक्ष्यं तु स्तेनं अस्तेनमानिनम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो मनुष्य (अस्वामी) किसी वस्तु का स्वामी नहीं होता हुआ भी (स्वामी + असंमतः) उस वस्तु के असली स्वामी की प्राज्ञा लिए बिना (परस्य स्वंविक्रीणीते) दूसरे की सम्पत्ति को बेच देता है (अस्ते नमानिनम्) चोर होते हुए भी स्वयं को चोर न समझने वाले (स्तेनं तम्) उस चोर व्यक्ति की (साक्ष्यं न नयेत) साक्षी या बातों को प्रामाणिक न माने ॥१९७॥