Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 196 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 196

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/196
Adhyay 8 Shloka 196
Shloka
निक्षिप्तस्य धनस्यैवं प्रीत्योपनिहितस्य च। राजा विनिर्णयं कुर्यादक्षिण्वन्न्यासधारिणम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(एवम्) इस प्रकार [८ | १७६ से ८ | १६५ तक ] (निक्षेपस्य) धरोहर के रूप में रखे गये (च) और (प्रीत्या+उपनिहितस्य धनस्य) प्रेमपूर्वक उपनिधि आदि के रूप में रखे गये धन का (न्यासधारिणम् अक्षिण्वन्) जिससे घरोहर रखने वाले को किसी प्रकार की हानि न हो ऐसे (राजा विनिरणयं कुर्यात्) राजा निरर्णय करे ॥१९६॥