Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 19 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 19

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 19
Shloka
राजा भवत्यनेनास्तु मुच्यन्ते च सभासदः। एनो गच्छति कर्तारं निन्दार्हो यत्र निन्द्यते॥

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Meaning
(यत्र) जिस सभा में (निन्दा + ग्रर्हः निन्द्यते) निन्दा के योग्य की निन्दा, स्तुति के योग्य की स्तुति, दण्ड के योग्य को दण्ड और मान्य के योग्य का मान्य होता है, वहां (राजा च सभासदः) राजा और सब सभासद् (अनेनाः + तु मुच्यन्ते) पाप से रहित और पवित्र हो जाते हैं (कर्तारं एनः गच्छति) पाप के कर्ता ही को पाप प्राप्त होता है ॥१९॥ (स० प्र० षष्ठ समु०)