Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 189 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 189

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 189
Shloka
चौरैर्हृतं जलेनोढं अग्निना दग्धं एव वा। न दद्याद्यदि तस्मात्स न संहरति किं चन॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(तस्मात्) रखे हुए धरोहर में से (यदि सः किञ्चन न संहरति) यदि धरोहर लेने वाला कुछ नहीं लेता है और धरोहर (चौरै: हृतम्) चोरों के द्वारा चुरा ली जाये (जलेन + ऊढम्) जल में बह जाये (वा) या (अग्निना एव दग्धम्) प्राग से ही जल जाये तो (न दद्यात्) धरोहर लेने वाला धरोहर को न लौटाये॥१८९॥