Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 187 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 187

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 187
Shloka
अच्छलेनैव चान्विच्छेत्तं अर्थं प्रीतिपूर्वकम्। विचार्य तस्य वा वृत्तं साम्नैव परिसाधयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(तम् + अर्थम्) यदि उस व्यक्ति के पास कुछ धन रह भी गया है तो उस धन को (अच्छलेन) छलरहित होकर (प्रोतिपूर्वकम् +एव) प्रेमपूर्वक ही (अनु + इच्छेत्) लेने की इच्छा करे (वा) और (तस्य वृत्तं विचार्य) उसके भलेपन को ध्यान में रखते हुए [कि उसने स्वयं ही कुछ धन लौटा दिया] (साम्ना + एव परिसाधयेत्) शान्तिपूर्वक या मेल-जोल से ही धनप्राप्ति के काम को सिद्ध करले॥१८७ ।।