Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 185 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 185

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/185
Adhyay 8 Shloka 185
Shloka
निक्षेपोपनिधी नित्यं न देयौ प्रत्यनन्तरे। नश्यतो विनिपाते तावनिपाते त्वनाशिनौ॥

Bhashya

Meaning
(नित्यम्) कभी भी (निक्षेप + उपनिधी) बिना मुहरबन्द धरोहर और मुहरबन्द धरोहर (अनन्तरे प्रति) देने वाले से भिन्न किसी व्यक्ति को [चाहे वे पुत्र आदि ही क्यों न हों] (न देयौ) नहीं देनी चाहिए (तो) ये (विनिपाते नश्यतः) देने वाले के मर जाने पर नष्ट हो जाती हैं अर्थात् लौटानी नहीं पड़तीं (तु) और (अनिपाते) जीवित रहते हुए (अनाशिनौ) कभी नष्ट नहीं होतीं॥१८५॥