Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 183 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 183

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 183
Shloka
स यदि प्रतिपद्येत यथान्यस्तं यथाकृतम्। न तत्र विद्यते किं चिद्यत्परैरभियुज्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(सः) वह धरोहर लेने वाला अभियोगी व्यक्ति [अनेक बार, विभिन्न प्रकार के उपायों से परीक्षा करने के पश्चात् ] (यदि यथान्यस्तं यथाकृतं प्रतिपद्येत) यदि रखी हुई धरोहर को ज्यों का त्यों वापिस कर दे तो (यत् परैः + अभियुज्यते) जो दूसरों के द्वारा उस पर अभियोग लगाया गया है (तत्र न किंचित् विद्यते) उसमें कुछ सच्चाई नहीं है, ऐसा समझना चाहिए॥१८३॥