Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 182 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 182

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 182
Shloka
साक्ष्यभावे प्रणिधिभिर्वयोरूपसमन्वितैः। अपदेशैश्च संन्यस्य हिरण्यं तस्य तत्त्वतः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(साक्षी + प्रभावे) दिये गये धरोहर-धन को सिद्ध करने के लिए यदि साक्षी न हों [तो उसकी जांच-पड़ताल का एक उपाय यह है कि राजा] (वयः-रूपसमन्वितैः) ठीक आयु वाले और समयानुसार विविध रूप बनाने की कला से युक्त (प्रणिधिभिः) गुप्तचरों के द्वारा (अपदेश:) विभिन्न बहानों एवं तरीकों से (तत्त्वतः) जो नकली प्रतीत न हों अर्थात् ऐसी स्वाभाविक पद्धति से (तस्य) (हिरण्यं संन्यस्य) धरोहर आदि धन रखवाकर फिर उस अभियोगी के यहां मांगे ॥१८२॥