Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 180 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 180

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 180
Shloka
यो यथा निक्षिपेद्धस्ते यं अर्थं यस्य मानवः। स तथैव ग्रहीतव्यो यथा दायस्तथा ग्रहः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो धरोहर रखने वाला (मानव:) मनुष्य (यम् + अर्थम्) जिस धन को (यस्य हस्ते) जिस किसी के हाथ में (यथा निक्षिपेत्) जैसे अर्थात् मुहरबन्द या बिना मुहरबन्द, साक्षियों के सामने या एकान्त में, जैसी धन की मात्रा अवस्था आदि स्थिति के रूप में रखे (सः) वह धन (तथा+एव) वैसी स्थिति के अनुसार ही (ग्रहीतव्यः) वापिस लेना चाहिए क्योंकि (यथा दायः तथा ग्रहः) जैसा देना वैसा ही लेना होता है ॥१८०॥