Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 18 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 18

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 18
Shloka
पादोऽधर्मस्य कर्तारं पादः साक्षिणं ऋच्छति। पादः सभासदः सर्वान्पादो राजानं ऋच्छति॥

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Meaning
राजभसा में पक्षपात से किये गये अन्याय का अधर्म (पाद:) चौथाई (अधर्मस्य कर्तारम्) अधर्म के कर्त्ता को (पाद:) चौथाई (साक्षिणम्) साक्षी को (ऋच्छति) प्राप्त होता है, प्रौर (पाद:) चौथाई अंश (सर्वान् सभासद:) शेष सब न्यायसभा के सदस्यों को तथा (पादः) चौथाई (राजानम्) राजा को (ऋच्छति) प्राप्त होता है ॥१८॥ (स० प्र० षष्ठ समु०)