Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 17 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 17

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 17
Shloka
एक एव सुहृद्धर्मो निधानेऽप्यनुयाति यः। शरीरेण समं नाशं सर्वं अन्यद्धि गच्छति॥

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Meaning
इस संसार में (एक: धर्मः एव सुहृद्) एक धर्म ही सुहृद् [ = मित्र ] है (यः) जो (निधने + अपि-+-अनुयाति) मृत्यु के पश्चात् भी साथ चलता है (य सर्वं हि) और सब पदार्थ वा संगी (शरीरेण समं नाशं गच्छति) शरीर के नाश के साथ ही नाश को प्राप्त होते हैं अर्थात् सब संग छूट जाता है परन्तु धर्म का संग कभी नहीं छूटता ॥१७॥ (स० प्र० षष्ठ समु०)