Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 167 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 167

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 167
Shloka
कुटुम्बार्थेऽध्यधीनोऽपि व्यवहारं यं आचरेत्। स्वदेशे वा विदेशे वा तं ज्यायान्न विचालयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(आधि + अधीन: + अपि) कोई अधीनस्थ व्यक्ति [पुत्र, सेवक आदि ] भी यदि (कुटुम्बार्थे) परिवार के भरण-पोषण के लिए (स्वदेशे वा विदेशे वा) स्वदेश वा विदेश में (यं व्यवहारम् + प्राचरेत्) जिस लेन-देन के व्यवहार को कर लेवे (ज्यायान्) घर का बड़ा = मुखिया आदमी (तं न विचालयेत्) उस व्यवहार को टालमटोल न करे अर्थात् उसे स्वीकार करके चुकता करदे॥१६७॥