Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 166 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 166

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
8/166
Adhyay 8 Shloka 166
Shloka
ग्रहीता यदि नष्टः स्यात्कुटुम्बार्थे कृतो व्ययः। दातव्यं बान्धवैस्तत्स्यात्प्रविभक्तैरपि स्वतः॥

Bhashya

Meaning
(कुटुम्बार्थं व्ययः कृतः) यदि किसी व्यक्ति ने परिवार के लिए ऋण लेकर खर्च किया हो और (यदि ग्रहीता नष्ट: स्यात्) अगर लेने वाला मर गया हो तो (तत्) वह ऋण (बान्धवैः) उसके पारिवारिक सम्बन्धियों को (विभक्तैः + अपि) चाहे वे अलग-अलग भी क्यों न हो गये हों (स्वतः) अपने धन में से (दातव्यम्) देना चाहिए ॥१६६॥