Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 162 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 162

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 162
Shloka
निरादिष्टधनश्चेत्तु प्रतिभूः स्यादलंधनः। स्वधनादेव तद्दद्यान्निरादिष्ट इति स्थितिः॥

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1 Bhashyas
Meaning
(चेत्) यदि (प्रतिभूः निरादिष्टधनः) ऋरणी ने अपने जमानती को धन सौंप रखा हो (च) और (अलंघन स्यात्) ॠरणी ने जमानती से ॠरणदाता को वह धन लौटा देने की आज्ञा न दी हो तो ऐसी स्थिति में (निरादिष्ट:) वह आज्ञा न दिया हुआ जमानती अथवा मरने पर जमानती का पुत्र (तत् स्वधनात् एव दद्यात्) [ऋरणदाता के मांगने पर ] उसका धन अपने धन में से ही लौटा देवे (इति स्थितिः) ऐसी शास्त्रमर्यादा है ॥१६२॥