Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 161 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 161

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 161
Shloka
अदातरि पुनर्दाता विज्ञातप्रकृतावृणम्। पश्चात्प्रतिभुवि प्रेते परीप्सेत्केन हेतुना॥

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1 Bhashyas
Meaning
(अदातरि पुनः विज्ञातप्रकृतौ) अदाता जमानती की प्रतिज्ञा की ऋणदाता को जानकारी होने की स्थिति में अर्थात् जमानती ने ऋण देने की जमानत नहीं ली है किन्तु केवल ऋणी को ऋरणदाता के सामने नियत समय पर उपस्थित करने की जमानत ली है, और जमानती की इस प्रतिज्ञा को ऋणदाता जानता भी है ऐसे (प्रतिभुवि प्रेते पश्चात्) जमानती के मर जाने के बाद (दाता केन हेतुना ऋणं परीप्सेत्) ऋणदाता किस कारण अर्थात् आधार पर [उसके पुत्रादि से] ऋण प्राप्त करने की इच्छा करेगा ? अर्थात् वह उसके पुत्र आदि से ऋरण प्राप्त करने का हकदार नहीं है ॥१६१॥