Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 160 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 160

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 160
Shloka
दर्शनप्रातिभाव्ये तु विधिः स्यात्पूर्वचोदितः। दानप्रतिभुवि प्रेते दायादानपि दापयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(दर्शन-प्रातिभाव्ये तु) कर्जदार को उपस्थित करने का जमानती होने में तो (पूर्वचोदितः विधि: स्यात्) पहले [८ | १५६ में ] कही हुई विधि लागू होगी किन्तु (दान-प्रतिभुवि प्रेते) ॠरण आदि देने का जमानती होकर [कि अगर कर्जदार नहीं देगा तो मैं दूंगा] पुनः जमानती के मर जाने पर (दायादान् + अपि दापयेत्) राजा जमानत के धन को उसके वारिस पुत्र आदिकों से भी दिलवाये ॥१६०॥