Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 155 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 155

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 155
Shloka
अदर्शयित्वा तत्रैव हिरण्यं परिवर्तयेत्। यावती संभवेद्वृद्धिस्तावतीं दातुं अर्हति॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(प्रदर्शयित्वा) यदि कर्जदार व्याज न दे सके तो (तत्र + एव हिरण्यं परिवर्तयेत्) व्याज को मूलधन में जोड़कर सारे को मूलधन मानकर नया कागज लिख दे (यावती वृद्धि: संभवेत्) उस पर फिर जितना ब्याज बनेगा (तावतीं दातुम् + अर्हति) उतना उसे देना होगा ॥१५५॥