Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 154 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 154

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 154
Shloka
ऋणं दातुं अशक्तो यः कर्तुं इच्छेत्पुनः क्रियाम्। स दत्त्वा निर्जितां वृद्धिं करणं परिवर्तयेत्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो कर्जदार (ऋणं दातुम् + अशक्तः) निर्धारित समय पर ऋरण न लौटा सकता हो और (पुनः क्रियां कर्तुम् + इच्छेत्) फिर आगे भी क्रिया== उस ऋण को जारी रखना चाहता हो तो (सः) वह (निर्जितां वृद्धि दत्त्वा) उस समय तक के ब्याज को देकर (करणं परिवर्तयेत्) लेन-देन का कागज नया लिख दे ॥१५४॥