Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 151 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 151

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 151
Shloka
कुसीदवृद्धिर्द्वैगुण्यं नात्येति सकृदाहृता। धान्ये सदे लवे वाह्ये नातिक्रामति पञ्चताम्॥

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1 Bhashyas
Subject
दुगुने से अधिक मूलधन न लेने का आदेश
Meaning
(सकृत् + आहृता) एक बार लिए ऋरण पर (कुसीदवृद्धिः) ब्याज की वृद्धि (द्वेगुण्यं न + अत्येति) मूलधन से दुगुने से अधिक नहीं होनी चाहिए (धान्ये), अन्नादि धान्य (सदे) वृक्षों के फल (लवे) ऊन (वाह्य) भारवाहक पशु बैल आदि (पञ्चतां न + अतिक्रामति) मूल से पांचगुने से अधिक नहीं होने चाहिएं ॥१५१॥