Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 143 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 143

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 143
Shloka
न त्वेवाधौ सोपकारे कौसीदीं वृद्धिं आप्नुयात्। न चाधेः कालसंरोधान्निसर्गोऽस्ति न विक्रयः॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(सोपकारे) उपकार अर्थात् साथ के साथ लाभ पहुंचाने वाली (आधौ) बधक रखी धरोहर [जैसे भूमि, घर, गौ आदि] पर (कौसीदीं वृद्धि न तु + एव प्राप्नुयात्) ब्याज की वृद्धि बिल्कुल न ले (च) और (कालसंरोधात्) बहुतं समय बीत जाने पर भी (आधे:) उस धरोहर को (न निसर्गः) न रखने वाले के अधिकार से छुड़ाया जा सकता है अर्थात् उसी की वह वस्तु रहेगी (न विक्रयः) न दूसरे को बेचा जा सकता है ॥१४३॥