Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 14 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 14

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 14
Shloka
यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च। हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः॥

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Meaning
(यत्र) जिस सभा में (प्रेक्षमाणानाय) बैठे हुए सभासदों के सामने (अधर्मेण हि धर्मः) अधर्म से धर्म (च) और (अनृतेन सत्यं) झूठ से सत्य का (हन्यते) हनन होता है (तत्र) उस सभा में (सभासदः हताः) सब सभासद् मरे से ही हैं ॥१४॥ (स० वि० गृहाश्रम प्र०)