Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 132 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 132

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 132
Shloka
जालान्तरगते भानौ यत्सूक्ष्मं दृश्यते रजः। प्रथमं तत्प्रमाणानां त्रसरेणुं प्रचक्षते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(भानौ जालान्तरगते) सूर्य की किरणों के मकान की खिड़कियों के अन्दर से प्रवेश करने पर [ उस प्रकाश में ] (यत् सूक्ष्मं रजः दृश्यते) जो बहुत छोटा रजकण (कण) दिखाई पड़ता है (तत्) वह (प्रमाणानां प्रथमम्) प्रमाणों = मापकों में पहला प्रमाण है, और उसे (त्रसरेणुं प्रचक्षते) 'त्रसरेणु' कहते हैं ॥१३२॥ महर्षि दयानन्द ने इस श्लोक को 'त्रसरेणु' के लक्षण-प्रसंग में 'पूना प्रवचन' में पृष्ठ ८६ पर उद्धृत किया है।(सं०)