Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 130 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 130

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 130
Shloka
वधेनापि यदा त्वेतान्निग्रहीतुं न शक्नुयात्। तदैषु सर्वं अप्येतत्प्रयुञ्जीत चतुष्टयम्॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
राजा (एतान्) इन अपराधियों को (यदा) जब (ववेन + अपि) शारीरिक दण्ड से भी (निग्रहीतुं न शक्नुयात्) नियन्त्रित न कर सके (तत् + एषु) तो इन पर (सर्वम्+अपि+एतत् चतुष्टयं प्रयुञ्जीत) सभी उपरोक्त [८ | १२६] चारों दण्डों को एक साथ और तीव्ररूप में लागू कर देवे ॥१३०॥