Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 13 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 13

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 13
Shloka
सभां वा न प्रवेष्टव्यं वक्तव्यं वा समञ्जसम्। अब्रुवन्विब्रुवन्वापि नरो भवति किल्बिषी॥

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1 Bhashyas
Meaning
धार्मिक मनुष्य को योग्य है कि (सभां न प्रवेष्टव्यम्) सभा में कभी प्रवेश न करे (वा) और जो प्रवेश किया हो तो (समञ्ज्सम्) सत्य ही (वक्तव्यम्) बोले (नरः अब्रुवन्) जो कोई सभा में अन्याय होते हुए को देखकर मौन रहे (अपि वा) अथवा (विब्र वन्) सत्य, न्याय के विरुद्ध बोल वह (किल्विषी भवति) महापापी होता है ॥१३॥ (स० प्र० षष्ठ समु०)