Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 129 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 129

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 129
Shloka
वाग्दण्डं प्रथमं कुर्याद्धिग्दण्डं तदनन्तरम्। तृतीयं धनदण्डं तु वधदण्डं अतः परम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(प्रथमं वाक् + दण्डम्) प्रथम वाणी का दण्ड अर्थात् उसकी 'निन्दा ' (तत् + अनन्तरम्) दूसरा (धिक् + दण्डम्) 'धिक्' दण्ड अर्थात् तुझको धिक्कार है, तूने ऐसा बुरा काम क्यों किया (तृतीयं धनदण्डम्) तीसरा - उससे धन लेना, और (वधदण्डम्) 'वघ' दण्ड अर्थात् उसको कोड़ा या बेंत से मारना वा शिर काट देना॥१२९॥(स० प्र० षष्ठ समु०)