Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 128 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 128

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 128
Shloka
अदण्ड्यान्दण्डयन्राजा दण्ड्यांश्चैवाप्यदण्डयन्। अयशो महदाप्नोति नरकं चैव गच्छति॥

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1 Bhashyas
Meaning
(राजा) जो राजा (दण्ड्यान् अदण्डयन्) दण्डनीयों को न दण्ड (प्रदण्ड्यान् दण्डयन्) अदंडनीयों को दण्ड देता है अर्थात् दण्ड देने योग्य को छोड़ देता और जिसको दण्ड देना न चाहिए उस को दण्ड देता है वह (महत् अयश: आप्नोति) जीता हुआ बड़ी निन्दा को (च) और (नरकम् एव गच्छति) मरे पीछे बड़े दुःख को प्राप्त होता है इसलिए जो अपराध करे उसको सदा दण्ड देवे और अपराधी को दण्ड कभी न देवे॥१२८ । (स० प्र० षष्ठ समु०)