Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 127 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 127

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 127
Shloka
अधर्मदण्डनं लोके यशोघ्नं कीर्तिनाशनम्। अस्वर्ग्यं च परत्रापि तस्मात्तत्परिवर्जयेत्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(लोके अधर्मदण्डनम्) क्योंकि इस संसार में जो अधर्म से दण्ड करना है वह (यशोघ्नं कीर्तिनाशनम्) पूर्वप्रतिष्ठा वर्त्तमान और भविष्यत् में, और परजन्म में होने वाली कीर्ति का नाश करने हारा है (च) और (परत्र + अपि अस्वर्ग्यम्) परजन्म में भी दुःखदायक होता है (तस्मात्) इसलिये (तत् परिवर्जयेत्) अधर्मयुक्त दण्ड किसी पर न करे॥१२७॥(स० प्र० षष्ठ समु०)