Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 126 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 126

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 126
Shloka
अनुबन्धं परिज्ञाय देशकालौ च तत्त्वतः। सारापराधो चालोक्य दण्डं दण्ड्येषु पातयेत्॥

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Meaning
परन्तु जो-जो दण्ड लिखा है और लिखेंगे, जैसे- लोभ से साक्षी देने में पन्द्रह रुपये दश प्राने दण्ड लिखा है परन्तु जो अत्यन्त निर्धन हो तो उससे कम, और धनाढ्य हो तो उससे दूना, तिगुना और चौगुना तक भी ले लेवे अर्थात् जैसा देश, जैसा काल और जैसा पुरुष हो उस का जैसा आपराध हो वैसा ही दण्ड करे। (स० प्र० षष्ठ समु०) न्यायकर्त्ता (अनुबन्धम्) अपराध को (च) और (तत्त्वतः अपराधी का इरादा या बार-बार किये गये देशकालौ) सही रूप में देश और काल को (परिज्ञाय) जानकर (च) तथा (सार-अपराधौ) अपराधी की शारीरिक एव आर्थिक शक्ति और अपराध का स्तर (आलोक्य) देख- विचार कर (दण्ड्यषु दण्डं पातयेत्) दण्डनीय लोगों को दण्ड दे॥१२६॥