Adhyay 8

Manusmriti

Shloka 12 Chapter Eight

Adhyay 8
Shloka 12

Chapter Eight

Subject: राजधर्मान्तर्गत व्यवहार - निर्णय

420 Shloka
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Adhyay 8 Shloka 12
Shloka
धर्मो विद्धस्त्वधर्मेण सभां यत्रोपतिष्ठते। शल्यं चास्य न कृन्तन्ति विद्धास्तत्र सभासदः॥

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Subject
मुकद्दमों के निर्णय में धर्म की रक्षा की प्रेरणा
Meaning
(यत्र) जिस सभा में (अधर्मेण विद्ध: धर्म:) धर्म से घायल होकर धर्म (उपतिष्ठते) उपस्थित होता है (च अस्य शल्यं न कृन्तन्ति) जो उसका शल्य अर्थात् तीरवत् धर्म के कलंक को निकालना और अधर्म का छेदन नहीं करते अर्थात् धर्मी को मान, अधर्मी को दण्ड नहीं मिलता (तत्र) उस सभा में (सभासद: विद्धाः) जितने सभासद् हैं वे सव घायल के समान समझे जाते हैं ॥१२॥ (स० प्र० षष्ठ समु०)