Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 98 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 98

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 98
Shloka
राज्ञश्च दद्युरुद्धारं इत्येषा वैदिकी श्रुतिः। राज्ञा च सर्वयोधेभ्यो दातव्यं अपृथग्जितम्॥

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1 Bhashyas
Meaning
(च) परन्तु सेनास्थ जन भी उन जीते हुए पदार्थों में से (उद्धारं राज्ञः दधुः) सोलहवां भाग राजा को देवें (च) और (राज्ञा) राजा भी (सर्वयोवेभ्यः) सेनास्थ योद्धाओं को (अपृथक् जितम्) उस धन में से जो सब ने मिलकर जीता हो (दातव्यम्) सोलहवां भाग देवे ।और जो कोई युद्ध में मर गया हो उसकी स्त्री और सन्तान को उसका भाग देवे और उसकी स्त्री तथा असमर्थ लड़कों का यथावत् पालन करें। जब उसके लड़के समर्थ हो जावें तब उनको यथायोग्य अधिकार देवे । जो कोई अपने राज्य की वृद्धि, प्रतिष्ठा, विजय और आनन्दवृद्धि की इच्छा रखता हो, वह इस मर्यादा का उल्लंघन कभी न करे॥९८॥