Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 96 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 96

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 96
Shloka
यच्चास्य सुकृतं किं चिदमुत्रार्थं उपार्जितम्। भर्ता तत्सर्वं आदत्ते परावृत्तहतस्य तु॥

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1 Bhashyas
Subject
(यत् किंचित् तत्) जैसा कुछ दण्ड देवे उससे ........
Meaning
(च) और (यत् किंचित् अस्य सुकृतम्) जो उसकी प्रतिष्ठा है (अमुत्रार्थम उपार्जितम्) जिससे इस लोक और परलोक में सुख होने वाला था (तत् सर्वं भर्त्ता प्रदत्ते) उसको उसका स्वामी ले लेता है (परावृत्तहतस्य तु) जो भागा हुआ मारा जाये. उसको कुछ भी सुख नहीं होता, उसका पुण्यफल नष्ट हो जाता और उस प्रतिष्ठा को वह प्राप्त हो जिसने धर्म से यथावत् युद्ध किया हो ॥९६॥