Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 95 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 95

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 95
Shloka
यस्तु भीतः परावृत्तः संग्रामे हन्यते परैः। भर्तुर्यद्दुष्कृतं किं चित्तत्सर्वं प्रतिपद्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(तु) और (यः) जो (परावृत्तः) पलायन अर्थात् भागे और x (भीतः परः हन्यते) डरा हुआ भृत्य शत्रुओं से मारा जाये वह (भत्तृ : दुष्कृतं प्रतिपद्यते) उस स्वामी के अपराध को प्राप्त होकर दण्डनीय होवे॥९५॥