Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 88 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 88

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 88
Shloka
समोत्तमाधमै राजा त्वाहूतः पालयन्प्रजाः। न निवर्तेत संग्रामात्क्षात्रं धर्मं अनुस्मरन्॥

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1 Bhashyas
Subject
युद्ध के लिए गमन तथा युद्धसम्बन्धी व्यवस्थाएं
Meaning
(प्रजाः पालयन् राजा) जब कभी प्रजा का पालन करने वाले राजा को (सम - उत्तम अधमै: आहूतः तु) अपने से तुल्य, उत्तम और छोटा संग्राम में आह्वान करे तो (क्षात्रं धर्मम् अनुस्मरन्) क्षत्रियों के धर्म का स्मरण करके (संग्रामात् न निवर्तेत) संग्राम में जाने से कभी निवृत्त न हो अर्थात् बड़ी चतुराई के साथ उनसे युद्ध करे, जिससे अपनी ही विजय हो॥८८॥