Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 82 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 82

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 82
Shloka
आवृत्तानां गुरुकुलाद्विप्राणां पूजको भवेत्। नृपाणां अक्षयो ह्येष निधिर्ब्राह्मोऽभिधीयते॥

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1 Bhashyas
Meaning
(नृपाणां ब्राह्मः एष: अक्षय: निधिः विधीयते) सदा जो राजाम्रों को वेदप्रचाररूप अक्षय कोश है (गुरुकुलात् प्रवृत्तानां पूजक: भवेत्) इसके प्रचार के लिए कोई यथावत् ब्रह्मचर्य से वेदादि शास्त्रों को पढ़कर गुरुकुल से आवे, उसका सत्कार, राजा और सभा यथावत् करें (विप्राणाम्) तथा उनका भी जिनके पढ़ाये हुए विद्वान् होवें । इस बात के करने से राज्य में विद्या की उन्नति होकर प्रत्यन्त उन्नति होती है॥८२॥