Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 81 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 81

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 81
Shloka
अध्यक्षान्विविधान्कुर्यात्तत्र तत्र विपश्चितः। तेऽस्य सर्वाण्यवेक्षेरन्नृणां कार्याणि कुर्वताम्॥

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1 Bhashyas
Subject
(लोके) राज्य में......
Meaning
उस राज्यकार्य में विविधप्रकार के अध्यक्षों को सभा नियत करे | इनका यही काम है – जितने जितने, जिस-जिस काम में राजपुरुप होवें नियमानुसार वर्त्तकर यथावत् काम करते हैं वा नहीं । जो यथावत् करें तो उनका सत्कार और जो विरुद्ध करें तो उनको यथावत् दण्ड दिया करे । (स० प्र० पष्ठ समु०) राजा (विविधान्) अनेक (विपश्चित: अध्यक्षान्) योग्य विद्वान् अध्यक्षों को (तत्र-तत्र) आवश्यकतानुसार विभिन्न कार्यों में (कुर्यात्) नियुक्त करे (ते) वे सब अध्यक्ष (अस्य) इस राजा द्वारा नियुक्त (सर्वाणि) सव (कार्याणि कुर्वताम्) कार्य करते (नृणाम्) लोगों का (अवेरन्) निरीक्षण करें॥८१॥