Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 66 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 66

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 66
Shloka
दूत एव हि संधत्ते भिनत्त्येव च संहतान्। दूतस्तत्कुरुते कर्म भिद्यन्ते येन मानवः॥

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1 Bhashyas
Meaning
दूत उसको कहते हैं जो फूट में मेल और मिले हुए दुष्टों को फोड़-तोड़ देवे, दूत वह कर्म करे जिससे शत्रुओं में फूट पड़े ।(स० प्र० पष्ठ समु०) (हि) क्योंकि (दूतः एव) दूत ही ऐसा व्यक्ति होता है जो (संधत्त) मेल करा देता है (च) और (संहतान् भिनत्ति एव) मिले हुए शत्रुओं में फूट भी डाल देता है (दूतः तत् कर्म कुरुते) दूत वह काम कर देता है (येन मानवाः भिद्यन्ते) जिससे शत्रुओं के लोगों में भी फूट पड़ जातो है ॥६६॥