Adhyay 7

Manusmriti

Shloka 64 Chapter Seven

Adhyay 7
Shloka 64

Chapter Seven

Subject: राजधर्म विषय

230 Shloka
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Adhyay 7 Shloka 64
Shloka
अनुरक्तः शुचिर्दक्षः स्मृतिमान्देशकालवित्। वपुष्मान्वीतभीर्वाग्मी दूतो राज्ञः प्रशस्यते॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
वह ऐसा हो कि (अनुरक्तः) राज-काम में अत्यन्त उत्साह प्रीतियुक्त (शुचि:) निष्कपटी, पवित्रात्मा (दक्षः) चतुर (स्मृतिमान्) बहुत समय की बात को भी न भूलने वाला (देशकालवित्) देश और कालानुकूल वर्तमान का कर्ता (वपुष्मान्) सुन्दररूपयुक्त (वीतभी:) निर्भय, और (वाग्मी) बड़ा वक्ता (राज्ञः दूत: प्रशस्यते) वही राजा का दूत होने में प्रशस्त है॥६४॥